दीपावली..क्यों दी जाती है उल्लुओं की बलि, इस अंधविश्वास के पीछे है ये मान्यता

October 12, 2017 - hetu chauhan

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उल्लू को ऐसा करते है तैयार आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ लोग दीवाली से लगभग 45 दिन पहले ही उल्लू खरीद लेते है और उसको पूजा के लिए तैयार करने के लिए रोज शराब पिलाई जाती है। दीपावली वाले दिन इसकी बलि देकर इसके कान, आंख और पंखों की भी पूजा करते है।

बलि देने के पीछे है ये अंधविश्वास कुछ लोगो का मानना है कि उल्लू, लक्ष्मी माता का प्रतीक होता है और धनतेरस या दीवाली वाले दिन इसकी बलि देने लक्ष्मी माता प्रसन्न होती है। ये लोग इस अंधविश्वास के चलते ये काम करते है और उल्लू की बलि देकर अधिक लक्ष्मी माता को प्रसन्न करते है जो कि सिर्फ अंधविश्वास है।

दीपावली यूं तो रोशनी का त्योहार अंधेरे को मिटाकर उजाला फैलाने के लिए मनाया जाने वाला त्योहार है। इस दिन भी लोग कई ऐसे काम करते है जो कि पूरी तरह से गलत होते है। एक ऐसी मां जो चाहती है कि मर जाए उसका इतलौता बेटा दिए की रोशनी में कई अंधविश्वास से भरे काम भी होते है जैसे कि इस दौरान उल्लुओं की बलि भी दी जाती है। इसके पीछे भी एक अंधविश्वास छिपा हुआ है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा।
मंहगे-मंहगे बिकते है उल्लू
उल्लू को ऐसा करते है तैयार आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ लोग दीवाली से लगभग 45 दिन पहले ही उल्लू खरीद लेते है और उसको पूजा के लिए तैयार करने के लिए रोज शराब पिलाई जाती है। दीपावली वाले दिन इसकी बलि देकर इसके कान, आंख और पंखों की भी पूजा करते है।
गैरकानूनी है उल्लू को मारना अगर आप नहीं जानते है तो जान लें कि उल्लू को मारना या बलि देना दोनो गैरकानूनी है। भारतीय कानून के अंतर्गत जो ऐसा करते पकड़ा गया उसको जेल तक हो सकती है। उल्लू की तस्करी करने की सजा 3 साल की तय की गई है।

मंहगे-मंहगे बिकते है उल्लू अगर आप किसी भी पक्षी को बाजार से खरीदते है तो सामान्यता वो आपको 400 से 500 तक मिल जाता है ऐसे ही उल्लू भी मिलता है। दीपावली के समय उल्लू की तस्करी तक की जाती है क्योंकि इस समय उल्लू की शुरुआती कीमत लगभग 10000 रुपए होती है।

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